Few lines on rani lakshmi bai in hindi. 10 lines Jhansi Rani Lakshmi Bai Essay in Hindi 2022-10-31

Few lines on rani lakshmi bai in hindi Rating: 4,9/10 1308 reviews

रानी लक्ष्मीबाई एक महान स्वतंत्रता सेनानी थीं। वह मध्य प्रदेश के झांसी के राजा रामजीत सिंह की पत्नी थीं और अपने जीवन काफी अधिकांश समय राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में लगी हुई थीं। उन्होंने स्वतंत्रता सेना के सदस्य भी बनाया था और उन्होंने अपने जीवन में भारत के अंग्रेजों से लड़ाई करके स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन की सबसे बड़ी संघर्ष खेली। वह स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ ही महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए भी स्वतंत्रता सेना के सदस्य बना हुआ था। उनकी स्वतंत्रता सेनानी में होने का योगदान

Rani Lakshmi bai Biography In Hindi (रानी लक्ष्मी बाई की जीवनी) Biography In Hindi राजा महाराजा

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यदि हां, तो आप इंटरनेट की दुनिया की सबसे बेस्ट वेबसाइट essayduniya. She was such a heroine who, at the age of 23, took the front from the army of the British Empire and attained martyrdom on the battlefield, but she did not allow the British to capture the state of Jhansi at all. If you have any problem then you can ask us by commenting below. Rani Lakshmi Bai Essay Early life:- Lakshmibai was born in the Varanasi district on 19 November 1828 in the family of a Marathi Brahmin. In 1851, Rani Lakshmibai and Gangadhar Rao were blessed with a son, He did the same and after adopting a son, Gangadhar Rao went to the next world on November 21, 1853. This short nibandh on rani lakshmi bai is very simple and easy to remember. You can also visit my YouTube channel which is Facebook at.

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Few Lines On Rani Lakshmi Bai In Hindi

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रानी लक्ष्मीबाई को एक बहादुर और निडर स्त्री के रूप में पहचाना जाता है! When was Rani Lakshmi Bai Born? These are some of the few important 10 lines on Rani Lakshmi Bai that not many people know. रानी लक्ष्मीबाई पर 10 लाइन निबंध — 10 Lines on Rani Lakshmi Bai In Hindi रानी लक्ष्मीबाई एक ऐसी वीरांगना थी जिन्होंने अपने देश की आजादी के लिए अंग्रेज सेना का डटकर मुकाबला किया और अन्तः वीरगति को प्राप्त हुई! Here, we Provided 10 lines Short Essay on Rani Lakshmi Bai. They may be asked to prepare a short speech or paragraph. She became capable of horse riding and fencing under the direction of Nana Saheb and Tatya Tope. सफल और आसान लाइफ जीने के लिए क्या जरुरी है! Rani Lakshmi Bai Essay Death of Rani Laxmi Bai In the month of January 1858, the English army started moving towards Jhansi and besieged the city in March. इस ब्लॉग में रेगुलर प्रेरणादायक Stories, Biography, Quotes प्रस्तुत होगी! Rani Lakshmi Bai Essay Conflict with the British rule — Rani Laxmibai started the formation of a volunteer army for the struggle against British rule. What is Rani Laxmi Bai famous for? Rani Lakshmi Bai Essay In the year 1842, Manu got hitched to the Lord of Jhansi, Gangadhar Rao.


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रानी लक्ष्मी बाई पर निबंध

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यदि आप भी 10 Lines on Rani Lakshmi Bai in Hindi यहां हम आपको शानदार 10 Lines on Rani Lakshmi Bai in Hindi उपलब्ध करा रहे हैं. दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम Rani Lakshmi Bai Par 10 Line Nibandh शेयर कर रहे है , उम्मीद करते है यह आपको निबंध प्रतियोगिता और exams में आपको काफी हेल्प करेगा! In this article we are covering one such topic i. Gangadhar Rao adopted son was named Damodar Rao. क्या आप भी 10 Lines on Rani Lakshmi Bai in Hindi की तलाश कर रहे हैं? रानी लक्ष्मीबाई का निधन 18 जून 1858 को हुआ! You can tell me by commenting on the comment box or going to Contact us page. This short nibandh on rani lakshmi bai in Hindi is generally useful for class 1, class 2, and class 3. The uprising layout from town to town, reach Jhansi in June 1857. इस निबंध को आप कक्षाओं के लिए या अपने किसी प्रोजेक्ट के लिए उपयोग कर सकते हैं.

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हिन्दी निबंध : झांसी की रानी लक्ष्मीबाई

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लाइफ में कोनसा कदम हमें ऊंचाइयों पर ले जायेगा! His childhood name was Manikarnika but the family used to affectionately call him Manu. The British confiscated the entire treasury of the state of Jhansi, Rani Laxmibai did not lose courage at all and made the full determination to protect Jhansi at any cost. Rani Lakshmibai 1 रानी लक्ष्मी बाई के बचपन का नाम मनू था। 2 इनका जन्म 19 नवंबर 1928 में ब्राम्हण परिवार में हुआ था। 3 रानी लक्ष्मीबाई मोरोपंत ताम्बे की पुत्री थी। 4 शास्त्रों के शिक्षा के साथ-साथ रानी लक्ष्मीबाई शस्त्रों के शिक्षा में भी अवगत थी। 5 राजा गंगाधर राव निंबालकर यह रानी लक्ष्मी बाई के पति थे। 6 राजा गंगाधर राव निंबालकर यह झांसी के राजा थे इस तरह से रानी लक्ष्मीबाई झांसी की रानी बन गई। 7 रानी लक्ष्मीबाई स्वाभिमानी अभिमानी और पराक्रमी वीरांगना थी। 8 गंगाधर राव और रानी लक्ष्मीबाई के दत्तक पुत्र का नाम दामोदर था। 9 हड़प नीति के तहत डलहौजी ने दत्तक वारसा।र्अमान्य कर कर दिया था। 10 अंग्रेजी सेना से लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई को वीरगति प्राप्त हुई। Hope above 10 lines on Rani Lakshmibai in Hindi will help you to study. Read on to find more about a few lines on Rani Lakshmi Bai in English and Some Lines about Rani Lakshmi Bai. मूल से 22 दिसंबर 2015 को. .

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रानी लक्ष्मीबाई पर 10 लाइन निबंध

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FAQ about 10 Lines on Rani Lakshmi Bai in Hindi According to another tradition Rani Lakshmibai, the Queen of Jhansi, dressed as a cavalry leader, was badly wounded; not wishing the British to capture her body, she told a hermit to burn it. Died: 18 June 1858, at Kota ki Sarai, Gwalior Scope: Rani Laxmi Bai of Jhansi, the heroine of the first Indian freedom struggle of 1857 Rani Lakshmibai was the queen of the Maratha-ruled Jhansi state and was the first Indian freedom struggle of 1857 against British rule. Dozens of British were murdered in the ensuing massacre by the rebels. ऐसी कहानिया जो पढ़कर लाइफ में कुछ करने का मन हो , ऐसी मोटिवेशनल कहानिया बताई जाएगी! In the year 1842, Manu was married to the Raja of Jhansi, Shri Gangadhar Rao Nimbalkar Ji and thus she became the queen of Jhansi and her name was changed from Manu to Lakshmibai. प्रस्तावना : भारतीय वसुंधरा को गौरवान्वित करने वाली झांसी की रानी वीरांगना लक्ष्मीबाई वास्तविक अर्थ में आदर्श वीरांगना थीं। सच्चा वीर कभी आपत्तियों से नहीं घबराता है। प्रलोभन उसे कर्तव्य पालन से विमुख नहीं कर सकते। उसका लक्ष्य उदार और उच्च होता है। उसका चरित्र अनुकरणीय होता है। अपने पवित्र उद्देश्य की प्राप्ति के लिए वह सदैव आत्मविश्वासी, कर्तव्य परायण, स्वाभिमानी और धर्मनिष्ठ होता है। ऐसी ही थीं वीरांगना लक्ष्मीबाई। संघर्ष : 27 फरवरी 1854 को लार्ड डलहौजी ने गोद की नीति के अंतर्गत दत्तकपुत्र दामोदर राव की गोद अस्वीकृत कर दी और झांसी को अंगरेजी राज्य में मिलाने की घोषणा कर दी। पोलेटिकल एजेंट की सूचना पाते ही रानी के मुख से यह वाक्य प्रस्फुटित हो गया, 'मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी'। 7 मार्च 1854 को झांसी पर अंगरेजों का अधिकार हुआ। झांसी की रानी ने पेंशन अस्वीकृत कर दी व नगर के राजमहल में निवास करने लगीं। यहीं से भारत की प्रथम स्वाधीनता क्रांति का बीज प्रस्फुटित हुआ। अंगरेजों की राज्य लिप्सा की नीति से उत्तरी भारत के नवाब और राजे-महाराजे असंतुष्ट हो गए और सभी में विद्रोह की आग भभक उठी। रानी लक्ष्मीबाई ने इसको स्वर्णावसर माना और क्रांति की ज्वालाओं को अधिक सुलगाया तथा अंगरेजों के विरुद्ध विद्रोह करने की योजना बनाई। विद्रोह :भारत की जनता में विद्रोह की ज्वाला भभक गई। समस्त देश में सुसंगठित और सुदृढ रूप से क्रांति को कार्यान्वित करने की तिथि 31 मई 1857 निश्चित की गई, लेकिन इससे पूर्व ही क्रांति की ज्वाला प्रज्ज्वलित हो गई और 7 मई 1857 को मेरठ में तथा 4 जून 1857 को कानपुर में, भीषण विप्लव हो गए। कानपुर तो 28 जून 1857 को पूर्ण स्वतंत्र हो गया। अंगरेजों के कमांडर सर ह्यूरोज ने अपनी सेना को सुसंगठित कर विद्रोह दबाने का प्रयत्न किया। लक्ष्मीबाई पहले से ही सतर्क थीं और वानपुर के राजा मर्दनसिंह से भी इस युद्ध की सूचना तथा उनके आगमन की सूचना प्राप्त हो चुकी थी। 23 मार्च 1858 को झांसी का ऐतिहासिक युद्ध आरंभ हुआ। कुशल तोपची गुलाम गौस खां ने झांसी की रानी के आदेशानुसार तोपों के लक्ष्य साधकर ऐसे गोले फेंके कि पहली बार में ही अंगरेजी सेना के छक्के छूट गए। उन्होंने नाना साहब और उनके योग्य सेनापति तात्या टोपे से संपर्क स्थापित किया और विचार-विमर्श किया। रानी की वीरता और साहस का लोहा अंगरेज मान गए, लेकिन उन्होंने रानी का पीछा किया। रानी का घोड़ा बुरी तरह घायल हो गया और अंत में वीरगति को प्राप्त हुआ, लेकिन रानी ने साहस नहीं छोड़ा और शौर्य का प्रदर्शन किया। कालपी में महारानी और तात्या टोपे ने योजना बनाई और अंत में नाना साहब, शाहगढ़ के राजा, वानपुर के राजा मर्दनसिंह आदि सभी ने रानी का साथ दिया। रानी ने ग्वालियर पर आक्रमण किया और वहां के किले पर अधिकार कर लिया। विजयोल्लास का उत्सव कई दिनों तक चलता रहा लेकिन रानी इसके विरुद्ध थीं। यह समय विजय का नहीं था, अपनी शक्ति को सुसंगठित कर अगला कदम बढ़ाने का था। उपसंहार : सेनापति सर ह्यूरोज अपनी सेना के साथ संपूर्ण शक्ति से रानी का पीछा करता रहा और आखिरकार वह दिन भी आ गया जब उसने ग्वालियर का किला घमासान युद्ध करके अपने कब्जे में ले लिया। रानी लक्ष्मीबाई इस युद्ध में भी अपनी कुशलता का परिचय देती रहीं। 18 जून 1858 को ग्वालियर का अंतिम युद्ध हुआ और रानी ने अपनी सेना का कुशल नेतृत्व किया। वे घायल हो गईं और अंततः उन्होंने वीरगति प्राप्त की। रानी लक्ष्मीबाई ने स्वातंत्र्य युद्ध में अपने जीवन की अंतिम आहूति देकर जनता जनार्दन को चेतना प्रदान की और स्वतंत्रता के लिए बलिदान का संदेश दिया।. These 10 Lines on Rani Lakshmi Bai are useful for students and children who need to write an essay or collect information about Rani Lakshmi Bai.

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रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी

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अभिगमन तिथि 27 मई 2020. This essay is very simple. Rani Lakshmi Bai Essay 4. After this episode, the ruler took on his nephew and named him Damodar Rao. Rani Lakshmi Bai Essay 3. If you liked this article, then please comment below and tell us how you liked it.

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10 lines on rani lakshmi bai in Hindi for class 1

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Did Rani Laxmibai speak English? मूल से 18 जून 2019 को. The level of these 10 sentences about rani lakshmi bai is medium so any student can write on this topic. विधि को भी नहीं दया आई। निसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ बुझा दीप झाँसी का तब डलहौज़ी मन में हरषाया, राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया, फ़ौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया, लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया। अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ अनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट शासकों की माया, व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया, डलहौज़ी ने पैर पसारे, अब तो पलट गई काया, राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया। रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ छिनी राजधानी दिल्ली की, लखनऊ छीना बातों-बात, कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर का भी घात, उदैपुर, तंजौर, सतारा,कर्नाटक की कौन बिसात? Today, we are sharing 10 lines on about rani lakshmi bai par 10 line Hindi mein. She was 12 years of age then, at that point. The general public of Jhansi supported the queen in this struggle. जब कि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात। बंगाले, मद्रास आदि की भी तो वही कहानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ रानी रोयीं रनिवासों में, बेगम ग़म से थीं बेज़ार, उनके गहने कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार, सरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार, 'नागपुर के ज़ेवर ले लो लखनऊ के लो नौलख हार'। यों परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ कुटियों में भी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान, वीर सैनिकों के मन में था अपने पुरखों का अभिमान, नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान, बहिन छबीली ने रण-चण्डी का कर दिया प्रकट आहवान। हुआ यज्ञ प्रारम्भ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी, यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी, झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी, मेरठ, कानपुर,पटना ने भारी धूम मचाई थी, जबलपुर, कोल्हापुर में भी कुछ हलचल उकसानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ इस स्वतंत्रता महायज्ञ में कई वीरवर आए काम, नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम, अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम, भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम। लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ इनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में, जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में, लेफ्टिनेंट वाकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में, रानी ने तलवार खींच ली, हुया द्वंद असमानों में। ज़ख्मी होकर वाकर भागा, उसे अजब हैरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार, घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार, यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार, विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार। अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥ विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी, अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुहँ की खाई थी, काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी, युद्ध श्रेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी। पर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय! Answer: रानी लक्ष्मीबाई को झाँसी की रानी के नाम से भी जाना जाता है। इनका जन्म 19 नवंबर 1835 में काशी में एक ब्रहाम्ण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम मोरोपंत तांबे और माता का नाम भागीरथी बाई था। लक्ष्मीबाई के बचपन का नाम मणिकर्निका था और प्यार से सब इन्हें मनु बुलाते थे। चौदह वर्ष से कम आयु में इनका विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव से कर दिया गया था। इन्होंने 18 वर्ष में ही झाँसी की बागडोर संभाल ली थी। यह बहुत ही सुंदर, चतुर और शस्त्र कला में निपुण थी। इन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान दिया था। लक्ष्मीबाई ने कभी भी खुद को लड़को से कम नहीं समझा था। वह युद्ध भूमि में लड़ने वाली वीरांगना थी जिसमें देशभक्ति की भावना कुट कुट कर भरी हुई थी। 18 जुन 1858 को लड़ते लड़ते ग्वालियर में उन्हें वीरगति की प्राप्ती हुई थी।.

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10 Lines on Rani Lakshmi Bai in Hindi: रानी लक्ष्मी बाई पर 10 लाइन

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We use your comments to further improve our service. जिस वजह से आप कभी भी कामयाब होने की उम्मीद नहीं छोड़ेंगे और success के साथ जुड़े रहेंगे! Why did the British attack Jhansi? After her death a few local people cremated her body. Yes, Lakshmibai did speak English but not well. After almost two weeks of struggle, the British took full control of the city, but Rani Laxmibai with her son Damodar Rao escaped from the British forces. Her child lived for a couple of months and afterwards died.

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10 Lines on Rani Lakshmi Bai in Hindi

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This surprised many because rani Lakshmi bai came from Maharashtra, where people spoke good English without any issues. Students who want to know a detailed knowledge about Rani Lakshmibai, then Here we posted a detailed view about 10 Lines Essay Rani Lakshmibai in Hindi. We hope you have got some learning on the above subject that was rani lakshmi bai par 10 line Hindi mein. We help the students to do their homework in an effective way. For any help regarding education Students please comment us. The British go around on Laxmibai, accusing her of plotting with the rebels to seek revenge for their refusal to accept her heir. Here we are always ready to help You.

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