Water crisis essay in hindi. वैश्विक जल संकट पर निबंध Essay on Global Water Crisis in Hindi 2022-10-27

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पानी की समस्या एक गंभीर समस्या है, जो वर्तमान में हमारे समाज और पर्यावरण के लिए एक बड़ी चुनौती है। हमारे देश में अधिकांश भागों में पानी की कमी एवं बहुत सारे हिस्सों में पानी की गंभीर अभाव है। इसलिए, हमारे देश में पानी की समस्या का समाधान एक अहम जगह है।

पानी की समस्या के कारण सबसे बड़े हैं जल हमला, जल उपयोग की अधिकता, जल संसाधनों का बेकार उपयोग, जल संसाधनों के खराब होने और जल संसाधनों का अप्रत्यक्ष उपयोग। जल हमला जलीय संसाधनों को हटा देता है, जो जल उपयोग की कमी और पानी की कमी का कारण बन जाते हैं। जल उपयोग क

जल संकट पर निबंध

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भारत में जल संकट निबंध — Essay On Water Crisis In India In Hindi जल मनुष्य, पशु, पक्षी व वनस्पति सभी के अस्तित्व व संवर्धन के लिए आधारभूत आवश्यकता है। गेटे ने जल के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए लिखा है कि प्रत्येक वस्तु जल से उत्पन्न होती है व जल के द्वारा ही प्रतिपादित होती है। जल के महत्त्व के मद्देनज़र यू. गहरे कुओं के माध्यम से भूजल के नकली पुनरुद्धार की योजना भूजल के नकली पुनरुद्धार के लिए चेतावनी सभा के अनुसार आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और तमिलनाडु में योजना को क्रियान्वित किया जा रहा है। 7. However, the availability of freshwater for human consumption is highly under stress because of a variety of factors. विश्व मौसम संगठन, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम UNEP और आईपीसीसी Intergovernmental Panel Climate Change के अनुसार हरित गृह गैसों के बढ़ते उत्सर्जनों के कारण इस शती में धरती के ताप में 1. पानी के इस्तेमाल में हमें मितव्ययी बनना होगा। छोटे-छोटे उपाय कर जल की बड़ी बचत की जा सकती है। मसलन हम दैनिक जीवन में पानी की बर्बादी कतई न करें और एक-एक बूँद की बचत करें। बागवानी जैसे कार्यों में भी जल के दुरुपयोग को रोकें। 8. मुरादाबाद के बिलारी रेलवे स्टेशन रोड वार्ड नंबर 3 में सबमर्सिबल खराब होने से 2 दिन से पानी का संकट गहरा गया। जिस कारण शिव मंदिर कॉलोनी के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। लोग बाल्टी लेकर इधर उधर से पानी लेने के लिए मजबूर हुए। कॉलोनी निवासी समाजसेवी विजयपाल सिंह राघव के प्रयासों से देर शाम तक सबमर्सिबल सही हो सका। गुरुवार की सुबह सबमर्सिबल खराब हुआ। नगर पालिका को अवगत भी कराया गया। परंतु शुक्रवार की दोपहर तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर नगर पालिका में फोन करने पर पता चला कि शनिवार की शाम तक ही सबमर्सिबल सही हो पाएगा। जिस पर लोगों में बेचैनी बढ़ गई। समाजसेवी विजय पाल सिंह राघव ने नगर पालिका कार्यालय प्रमुख संजय सक्सेना, जल निगम प्रभारी हुकुम सिंह, को फोन किया परंतु समस्या का समाधान होते ना देख कर कहीं से पालिका के अधिशासी अधिकारी दीपशिखा पांडे का फोन नंबर लेकर उन्हें समस्या से अवगत कराया। उन्होंने शीघ्र ही समस्या का निदान करने का आश्वासन दिया और नगरपालिका कर्मी नई मोटर लेकर पहुंचे। जिसे देर शाम तक ठीक किया गया।.


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विश्वव्यापी जल संकट (Global Water Crisis)

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Some parts of India facing drought while others are facing flood. Economic growth: A Niti Aayog report predicted that water demand will be twice the present supply by 2030 and India could lose up to 6% of its GDP during that time. What is the status of water availability in India? How is the water scarcity measured? ग्लोबल वार्मिग वैश्विक जल संकट सबसे बड़े कारण के रूप में इसलिए 4. What are the solutions to the water crisis in India? Due to inadequate sanitation they are exposed to water borne diseases such as cholera and typhoid fever etc. जल सुविधाओं के अभाव का सबसे अधिक दुष्प्रभाव शहरी क्षेत्रों में पड़ा है। 2.

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भारत में जल संकट निबंध

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सूखा और बाढ़ जैसी जल सम्बन्धी आपदाएँ 1996 के बाद से दुगनी होती गयी हैं। 2. In this regard Water Scarcity Essay Also Read: As almost 70% of fresh water is used in agriculture, making agricultural irrigation more efficient can be helpful in addressing water crisis. पानी के वर्तमान संकट के लिए बढ़ता हुआ हरित गृह प्रभाव Green House Effect भी जिम्मेदार है। पानी के वर्तमान जल स्तर के 20 प्रतिशत के लिए जलवायु परिवर्तन प्रमुख कारण है। 16. However, most regions of the country are still water deficient mainly because of inefficient water management practices. This crisis of water scarcity is most visible in India as well as in other developing countries. गत दशक में प्राकृतिक आपदाओं में 6 लाख 65 हजार लोगों की जानें गयीं। 3.


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Water crisis deepens due to submersible failure

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जल संरक्षण के लिये पर्यावरण संरक्षण जरूरी है। जब पर्यावरण बचेगा तभी जल बचेगा। पर्यावरण असंतुलन भी जल संकट का एक बड़ा कारण है। इसे इस उदाहरण से समझ सकते हैं। हिमालय पर्यावरण के कारण सिकुड़ने लगे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सन 2030 तक ये ग्लेशियर काफी अधिक सिकुड़ सकते हैं। इस तरह हमें जल क्षति भी होगी। पर्यावरण संरक्षण के लिये हमें वानिकी को नष्ट होने से बचाना होगा। 10. प्रतिवर्ष 50 लाख व्यक्ति गन्दे पानी के इस्तेमाल के कारण मौत के मुँह में जा समाते हैं। 4. College, Pratapgarh City, Pratapgarh-230002, U. कॉलेज, प्रतापगढ़ सिटी,- प्रतापगढ़-230002 उ. Coordination in aquifer usage: There is anurgent need for coordination among users for aquifers. इस आर्टिकल में हम जल संकट पर निबंध को विस्तार से समझेंगे, जोकि कक्षा 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 के छात्रों के लिये काफी सहयोगी है। तो, यदि आप कक्षा 5 से 12 के बिच में किसी भी क्लास के छात्र है, और आप essay on water crisis in hindi की खोज में है तो, यह लेख आपके लिये काफी मददगार साबित हो सकता है। क्योकी यहा पर हमने जल संकट पर निबंध हिंदी में बिल्कुल विस्तार से शेयर किया है जिसे आप असानी से पढ़ कर समझ सकते है। इसके अलावा यदि आप उन छात्रों में से है, जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे है। तो आपके लिये भी ये जल संकट पर निबंध काफी महत्वपूर्ण एवं फायदेमंद हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योकी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में jal sankat par nibandh जैसे प्रश्न भी पुछे जाते है। ऐसे में अगर आप इस निबंध को पढ़ कर समझे रहेंगे तो आपको परीक्षा में काफी मदद मिलेगी। यदि आप water crisis essay in hindi को अच्छे से समझना चाहते है तो, इस आर्टिकल को पुरा अन्त तक अवश्य पढ़े। इस जल संकट के निबंध में हम जल संकट से सम्बन्धित बहुत से प्रश्नों को विस्तार से समझेंगे जैसे की जल संकट के कारण, जल के प्रमुख स्रोत, जल संकट की स्थितिऔर जल संकट के उपाय आदि। तो चलिए अब हम hindi essay on water crisis को विस्तार से समझे। आज भारत ही नहीं, पूरा विश्व जल संकट की पीड़ा से त्रस्त है। आज मानव मंगल ग्रह पर जल की खोज में लगा हुआ है, लेकिन भारत सहित अनेक विकासशील देशों में आज भी पीने योग्य शुद्ध जल बहुत ही कम मात्रा में उपलब्ध है। दुनिया के क्षेत्रफल का लगभग 71% भाग जलयुक्त है, परन्तु पीने योग्य मीठा जल मात्र 3% ही है, शेष भाग खारा जल है। इसमें भी मात्र 1% मीठे जल का ही वास्तव में, हम उपयोग कर पाते हैं। सामान्यत: मीठे जल का 52% झीलों और तालाबों में, 38% मृदा, 8% वाष्प, 1% नदियों और 1% वनस्पति में निहित है। आर्थिक विकास, औद्योगिकीकरण और जनसंख्या विस्फोट से जल का प्रदूषण और जल की खपत बढ़ने के कारण जलचक्र बिगड़ता जा रहा है। वास्तव में, पृथ्वी पर जल की उपलब्धता के कारण ही प्राणियों का अस्तित्व और पदार्थों में उपयोगिता का गुण विद्यमान है, कहा भी जाता है - जल ही जीवन है। जल के बिना न तो मनुष्य का जीवन सम्भव है और न ही वह किसी कार्य को संचालित कर सकता है। एक क्षेत्र विशेष के अन्तर्गत जल उपयोग की माँगों को पूरा करने हेतु उपलब्ध जल संसाधनों की कमी को ही जल संकट कहते हैं। विश्व के सभी महाद्वीपों में रहने वाले लगभग 3 बिलियन लोग प्रत्येक वर्ष में कम-से-कम 30 दिन जल संकट का सामना करते हैं। लगभग 1.

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भारत में जल की समस्या पर निबंध (Essay on water problem in India)

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What are the measures taken by the government? अधिसंख्य उद्योग शहरों के आस-पास ही स्थापित हैं। शहरीकरण भी तेजी से अपने पाँव पसार रहा है। बढ़ते शहरीकरण का बोझ भी जल संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। अनुमानतः 2020 तक कुल जनसंख्या का 60 प्रतिशत अंश शहरों में आवास करेगा। ऐसी स्थिति में जलीय संसाधनों की कमी और उनके दूषण की समस्या और भयावह होगी। 15. इस कार्य में स्थानीय जनता, सत्ता और उद्योगों का सहकार लिया जाए । 5. जनसंख्या बढ़ने से जल उपभोग भी बढ़ता है ऐसे में विशिष्ट जल उपलब्धता प्रतिव्यक्ति नवीनीकृत जल संसाधन की उपलब्धता कम हो जाती है। अतएव इस परिप्रेक्ष्य में हमें जनसंख्या पर भी ध्यान देना होगा। 14. विगत शती के दौरान लगभग आधी दलदली जमीन समाप्त हो गयी, बहुत सी नदियाँ अब सागरों तक नहीं पहुँच पाती। मृदुजल में पाई जाने वाली मछलियों की 20 प्रतिशत प्रजातियाँ विलुप्त हो चुकी हैं। गहराते जल संकट के इन पर्यावरणीय दुष्प्रभावों का भविष्य में प्रतिकूल प्रभाव होगा जो हमारे स्वयं के अस्तित्व के लिए घातक सिद्ध होगा। 11. सन 2032 तक दुनिया की आधे से ज्यादा आबादी पानी की अत्यधिक कमी वाले क्षेत्रों में रहने को विवश होगी। ग्लोबल एनवायरटन्मेंट आउटलुक-3 5. Coordinated efforts among states for management of groundwater at a localized level. Community-level management: At the village level, there can be decentralized management of water at the community level.

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भारत में जल संकट पर निबंध

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Restrictions on water use per person were also fixed. Too much Irrigation in agriculture land making land unfertile and provoking the water crisis. जल संबंधी समस्याओं का निदान Diagnosis of Water Related Problems : वैज्ञानिकों का मानना है कि सीमित भण्डार होने के कारण है कि कोयला, गैस, तेल आदि ऊर्जा के साधन बहुत दिन तक आदमी का साथ नहीं देंगे । लेकिन वैज्ञानिक ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों की खोज में लगे हैं । यह भी कहा जाता है कृषि भूमि पर पड़ने वाले दबाव और प्रदूषण को देखते हुए उत्पादकता जनसंख्या के विस्तार का मुकाबला नहीं कर पायेगी । किन्तु जनसंख्या को परिसीमित करने के प्रयत्न चल रहे हैं और कृषि के क्षेत्र में उपज बढ़ेगी, इस चुनौती को विज्ञान कभी अनसुनी नहीं करेगा, ऐसी आशा आज की जा सकती है । भूमि को उर्वर बनाने का प्रयत्न, सिंचाई व्यवस्था और नई भूमि को कृषि के अन्तर्गत लाने का प्रयास उत्पादकता को बढ़ाने में सहायक होता है । वैज्ञानिक यह भी मानने लगे हैं कि यदि जमीन की नमी बनाए रखने या अन्दर के पानी को वाष्पीकरण से बचाए रखने से सूखे से बचा जा सकता है । इसके अतिरिक्त गेहूं, धान आदि की जो संकर किस्में पैदा की जा रही हैं, वे फसल में वृद्धि करती हैं । ऐसी स्थिति में शायद भविष्य में अकाल आदि से बचा जा सकेगा और यह भी आशा की जाती है कि विज्ञान कृषि भूमि पर होने वाले प्रदूषणों से उसकी रक्षा कर पाएगा । समुद्र से भी आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी जनता की आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाने में समर्थ होगी । सूर्य की ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा क्योंकि उसमें अमिट सम्भावनाएँ नजर आ रही हैं । सूर्य पृथ्वी पर 4. Conflicts over water : In India, there are conflicts between Karnataka and Tamil Nadu over sharing of Cauvery waters, between Gujarat and Madhya Pradesh over sharing of Narmada waters, between Andhra Pradesh and Telangana over sharing of Krishna waters, etc. विश्वभर में 23 प्रतिशत पानी का उपयोग उद्योगों में किया जाता है जिसका विकसित और विकासशील देशों में अनुपात 59 और 8 प्रतिशत का है। 4. What is the magnitude of the water crisis in India? Charging money for efficient use of water like electricity. This team of officers from the central government and district administration will visit and work on water-stressed districts and blocks to ensure water conservation initiatives.

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वैश्विक जल संकट पर निबंध Essay on Global Water Crisis in Hindi

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दूसरी ओर उपयुक्त विकल्पों की खोज की जाय, जिससे वायु का प्रदूषण न हो । 2. प्रति वर्ष उद्योगों से 30-50 करोड़ टन भारी धातुएँ, विषाक्त कचरा और व्यर्थ सामग्रियाँ जल संसाधनों में डाली जाती हैं। संसार का 80 प्रतिशत से अधिक औद्योगिक कचरा Industrial waste अमेरिका और अन्य औद्योगिक राष्ट्र उत्पन्न करते हैं। प्राकृतिक आपदाएँ 1. ADVERTISEMENTS: जल संकट पर निबंध Essay on Water Crisis in Hindi! विभिन्न फसलों के लिये पानी की कम खपत वाले तथा अधिक पैदावार वाले बीजों के लिये अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। 3. मृदा की शक्ति और भूगर्भीय संसाधन समाप्त होते जा रहे हैं, कल उनका स्थान कौन-सी चीज लेगी? राष्ट्रीय जल नीति, 2002 राष्ट्रीय जल नीति, 2002 को 1 अप्रैल 2002 को राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद द्वारा अनुमोदित किया गया था। 3. उसके लिए हरित पट्टी तैयार की जाए; उद्योगों की गैसों पर नियंत्रण रखा जाय । 3.

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जल संकट पर निबंध

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The freshwater that we use for drinking, bathing, irrigation etc. . Enhanced soil moisture sensors, monitoring, weather stations, and communications systems should be use to get accurate data to ensure water is not wasted. What is water scarcity? For example- Water ATMs at Marathwada provide water 25 paisa per litre a day. बढ़ते औद्योगिकरण का जल संसाधनों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। उद्योगों में पानी की सर्वाधिक खपत होती है, साथ ही ये कचरा युक्त पानी, औद्योगिक उच्छिष्ट Industrial Effluents जलाशयों में डालकर जल दूषण बढ़ाते हैं जिसका जलीय सम्पदा और मनुष्यों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जल संकट और जल दूषण दोनों समस्याएँ भविष्य में और भी गहराती जाएँगी। 14. Therefore balancing water demand with available supply is the need of the hour for future economic growth and development as well as for the sustenance of human life. राष्ट्रीय जल नीति, 1987 एक राष्ट्रीय जल नीति को पहली बार वर्ष 1987 में स्वीकार किया गया था। इस व्यवस्था के तहत, की विभिन्न योजनाएँ 2.

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Water Crisis in India: Causes, Effects & Solutions

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सफाई अपने आप में चुनौती बनकर उभर रही है। 1. उद्योगों, परिवहन, खनन, उत्खनन से होने वाले खतरे पर्यावरण के लिए समस्या बनते जा रहे हैं । 8. For instance, Drought is a recurrent phenomenon in Andhra Pradesh where no district is entirely free of droughts. औद्योगिक विकास और व्यावहारिक गतिविधियों की आड़ में जल के अंधाधुंध दोहन को रोकने के लिये तथा इस प्रकार से होने वाले जल प्रदूषण को रोकने के लिये कड़े व पारदर्शी कानून बनाये जाएँ। 9. These include creating awareness about water scarcity to understand the scope of the issue. Essay on Water Crisis Earth is only planet that has water which is primary source of life without which life is impossible.

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