Mahatma gandhi essay in hindi. Mahatma Gandhi Essay In Hindi 2022 महात्मा गांधी पर निबंध हिंदी में 2022-11-03

Mahatma gandhi essay in hindi Rating: 7,9/10 1786 reviews

Mahatma Gandhi, also known as "Bapu" or "Father of the Nation," was a key figure in India's independence movement and is revered as a national hero in the country. He is best known for his philosophy of nonviolence and civil disobedience, which he used to great effect in leading the Indian people in their struggle for independence from British rule. Gandhi was born on October 2, 1869, in Porbandar, a small town in the western Indian state of Gujarat. He received his early education in India, and later studied law in London, where he was called to the bar in 1891.

Gandhi returned to India and began practicing law in Bombay (now Mumbai), but he quickly became disillusioned with the legal profession and decided to devote himself to social and political reform. He was deeply influenced by the teachings of Jesus, Buddha, and other religious and philosophical figures, and he believed that the key to social change was nonviolence and the power of love and compassion.

Gandhi's philosophy of nonviolence, also known as "satyagraha," or "holding onto truth," was based on the belief that it was possible to achieve political and social change through non-violent means, such as civil disobedience and nonviolent resistance. Gandhi believed that the power of nonviolence lay in its ability to transform those who used it and to inspire others to follow its principles. He argued that nonviolence was not just a tactic, but a way of life that could be practiced by individuals, communities, and nations.

Gandhi's philosophy of nonviolence was put to the test in India's struggle for independence. In 1919, he led a campaign of civil disobedience against the British-imposed Rowlatt Act, which allowed the British authorities to imprison anyone without trial. The campaign, which involved boycotting British goods and institutions, was met with brutal repression by the British authorities, but it also sparked a wave of non-violent resistance across the country.

Gandhi's philosophy of nonviolence was also instrumental in the struggle for civil rights in other parts of the world, including in the United States during the civil rights movement led by Martin Luther King Jr. Gandhi's ideas and tactics inspired many civil rights leaders, and his legacy continues to inspire people around the world today.

Mahatma Gandhi was assassinated on January 30, 1948, by a fanatic who opposed his philosophy of nonviolence. However, his legacy lives on, and he is remembered as a symbol of hope and inspiration for people struggling for justice and freedom around the world.

Mahatma Gandhi Essay in Hindi 2022

mahatma gandhi essay in hindi

. मूल से 31 अगस्त 2019 को. १९३८ में जब पहली बार "यहूदीवाद और सेमेटीसम विरोधी" लिखी गई, गाँधी ने १९३० में हुए अगर मैं एक यहूदी होता और जर्मनी में जन्मा होता और अपना जीविकोपार्जन वहीं से कर रहा होता तो जर्मनी को अपना घर मानता इसके वावजूद कि कोई सभ्य जर्मन मुझे धमकाता कि वह मुझे गोली मार देगा या किसी अंधकूपकारागार में फ़ेंक देगा, मैं तडीपार और मतभेदीये आचरण के अधीन होने से इंकार कर दूँगा. Mahatma Gandhi always loved high thoughts. अभिगमन तिथि 17 अगस्त 2019.

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Mahatma Gandhi Essay in Hindi 100, 200, 500 Words महात्मा गांधी पर हिंदी निबंध » Desi Babu

mahatma gandhi essay in hindi

मूल से 12 सितंबर 2019 को. महात्मा गाँधी और लियो टालस्टाय के पत्र लांग बीच प्रकाशन: लांग बीच, १९८७, पीपी १८९. गाँधी एक राजनैतिक नीतिज्ञ के रूप में, अपने मूल्यों और राजनैतिक निबंधो के साथ. गाँधी जी को जबरदस्त अपराध अनुभव हुआ और इसके लिए वे अपने आप को कभी क्षमा नहीं कर सकते थे उन्होंने इस घटना का उल्लेख दोहरी शर्म में किया इस घटना का गाँधी पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा और वे ३६ वर्ष की आयु में यह निर्णय ब्रहमचर्य सादगी गाँधी जी का मानना था कि अगर एक व्यक्ति समाज सेवा में कार्यरत है तो उसे साधारण जीवन गाँधी सप्ताह में एक दिन मौन धारण करते थे. अभिगमन तिथि 17 अगस्त 2019. Gandhi Jayanti Poem in Hindi माँ खादी की चादर दे दो मैं गांधी बन जाऊँगा, सभी मित्रों के बीच बैठकर रघुपति राघव गाऊंगा, निक्कर नहीं धोती पहनूँगा खादी की चादर ओढुंगा, घड़ी कमर में लटकाऊँगा सैर-सवेरे कर आऊँगा, कभी किसी से नहीं लडूंगा और किसी से नहीं डरूंगा, झूठ कभी भी नहीं कहूँगा सदा सत्य की जय बोलूँगा, आज्ञा तेरी मैं मानूंगा सेवा का प्रण मैं ठानूंगा, मुझे रूई की बुनी दे दो चरखा खूब चलाऊंगा, गाँव में जाकर वहीँ रहूँगा काम देश का सदा करूँगा, सब से हँस-हँस बात करूँगा क्रोध किसी पर नहीं करूँगा, माँ खादी की चादर दे दो मैं गांधी बन जाऊंगा। मैं उम्मीद करूंगा की आपको ये लेख अच्छा लगा होगा, अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो देरी ना कीजिए, इस लेख को इतना शेयर कर दीजिये की दुनिया 02 अक्टूबर गांधी जी के जन्मदिन कविताएं को पढ़ कर रो पड़े। — धन्यवाद महात्मा गांधी का जीवन परिचय Mahatma Gandhi Essay in Hindi का यह लेख यही समाप्त होता है। मुझे उम्मीद है की आपको सभी जानकारी मिली होगी। अगर आपको लेख पसंद आया हो तो इसे शेयर जरुर करें और कमेंट के माध्यम से अपने विचार हमारे साथ व्यक्त करें। — Biography of Mahatma Gandhi in Hindi. यद्यपि, गाँधी जी को कुछ समय की मुक्ति देने के लिए एक दिन उनके चाचा जी आए वे आराम के लिए शयनकक्ष पहुंचे जहाँ उनकी शारीरिक अभिलाषाएं जागृत हुई और उन्होंने अपनी पत्नी से प्रेम किया नौकर के जाने के पश्चात् थोडी ही देर में ख़बर आई की गाँधी के पिता का अभी अभी देहांत हो गया है.


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Mahatma Gandhi essay : महात्मा गांधी पर हिन्दी में निबंध

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. Essay On Mahatma Gandhi In English Mahatma Gandhi Essay 2022 Mahatma Gandhi Par Nibandh : The 153nd birth anniversary of India's greatest leader and freedom fighter Mohandas Karamchand Gandhi is being celebrated. So let's know how to write an essay on Mahatma Gandhi in Hindi. मूल से 22 दिसंबर 2018 को. आध्यात्मिक साम्राज्यवाद से अस्वीकृति: गाँधी को बूबर के पत्रों की झलकी. I cant believe you arent more popular since you certainly have the gift. HinndiTopper is what every student preparing for banking and other related examination HindiTopper has everything that an aspirant needs.

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(New) Mahatma Gandhi Essay in Hindi

mahatma gandhi essay in hindi

उनके पिता की बीमारी के समय वे सदा उपस्थित रहते थे क्योंकि वे अपने माता-पिता के प्रति अत्यंत समर्पित थे. मैं भले ही अंधविश्वासी कहा जाऊँ, लेकिन जिस बात को मैं अपने हृदय की गहराई में महसूस कर रहा हूँ, उसे आपसे कहे बिना रह नहीं सकता।. Essay On Mahatma Gandhi In Hindi Nibandh भारतकेसबसेमहाननेतावस्वतंत्रतासेनानीमोहनदासकरमचंदगांधीकी 153वींजयंतीमनाईजारहीहै। 2 अक्टूबर 1869 कोगुजरातकेपोरबंदरमेंजन्मेंमहात्मागांधीकीशादीमात्र 13 सालकीउम्रमेंकस्तूरबाबाईसेहुई। 1890 मेंइंग्लैंडसेवकीलबनकरभारतलौटेऔरभारतीयस्वतंत्रतासंग्रामकेलिएअपनापूराजीवनदेदिया।ब्रिटिशोंकेखिलाफमहात्मागांधीनेकईआंदोलनकिए, जिसमेंचंपारणआंदोलन, खेड़ाआंदोलन, खिलाफतआंदोलन, नामकआंदोलनऔरभारतछोड़ोआंदोलनमुख्यरूपसेशामिलहै।स्कूलकॉलेजमेंमहात्मागांधीपरनिबंधलेखनप्रतियोगिताकाआयोजनकियाजाताहै।ऐसेमेंयदिआपकोभीमहात्मागांधीपरनिबंधलिखनाहैतोकरियरइंडियाआपकेलिएसबसेबेस्टमहात्मागांधीपरनिबंधआईडियाड्राफ्टलेकरआयाहै।जिसकीमददसेआपआसानीसेमहात्मागांधीपरनिबंधलिखपढ़सकतेहैं।तोआइयेजानतेहैंमहात्मागांधीपरनिबंधहिंदीमेंकैसेलिखें। महात्मागांधीपरनिबंध Essay On Mahatma Gandhi In Hindi भारतकेसभीमहानलोगोंमेंमहात्मागांधीकानामसबसेऊपररखागयाहै।महात्मागांधीनेदुनियाकीसबसेबड़ीमहाशक्तियोंमेंसेएकब्रिटिशराजकाअहिंसाबहिष्कारकियाऔरभारतकोआजादीदिलानेमेंसफलताप्राप्तकी।उनकीमृत्युकेबादभीपूरीदुनियाउन्हेंअपनाआदर्शमानतीहै।मोहनदासकरमचंदगांधीकाजन्म 2 अक्टूबर 1869 कोभारतकेपश्चिमीतटपरएकछोटेसेशहरपोरबंदरमेंहुआथा।उनकाजन्मवैश्यजातिकेएकमध्यमवर्गीयपरिवारमेंहुआथा।उनकेपिताकानामकरमचंदऔरमाताकानामपुतलीबाईथा।मोहनदासगांधीपोरबंदरकेएकप्राथमिकविद्यालयमेंपढ़े।उसकेदोभाईऔरएकबहनथीऔरवहसबसेछोटेथे।जबगांधीजीस्कूलमेंथेतबही 13 सालकीउम्रमेंउनकाविवाहकस्तूरबासेकरवादियागयाथा।गांधीजीकानूनकीपढ़ाईकेलिएइंग्लैंडगएऔर 1890 मेंएकवकीलबनकरलौटे। भारतआनेकेतुरंतबाद, उन्हेंदादाअब्दुल्लाएंडकंपनीनेएकमुकदमालड़नेकेलिएदक्षिणअफ्रीकाजानेकाप्रस्तावदिया।जिसकेबादउन्होंनेअपनेकेसस्टडीमेंपायाकिभारतीयोंऔरअफ्रीकीलोगोंकोभेदभावकासामनाकरनापड़रहाहै।गांधीकेजीवनमेंसबसेमहत्वपूर्णमोड़लानेवालीथी, जबवहट्रेनमेंप्रथमश्रेणीकेडिब्बेमेंचढ़नेलगेतोउन्हेंरोकदियागया।रंगभेदकीइसघटनाकेबादगांधीजीनेअपनेअधिकारोंकीलड़ाईकीवकालतकी।उन्होंनेदक्षिणअफ्रीकामेंअपनाप्रवासरखाऔरउसबिलकाविरोधकियाजिसनेभारतीयोंकोवोटदेनेकेअधिकारसेवंचितकरदियाथा।गांधीइक्कीससालतकदक्षिणअफ्रीकामेंरहे।उन्होंनेअंग्रेजोंद्वारावहांभारतीयोंकेसाथकिएगएअन्यायपूर्णव्यवहारकेखिलाफदक्षिणअफ्रीकामेंसत्याग्रहआंदोलनशुरूकिया।जिसकेबादभारतीयोंकेलिएवहएकमहानराजनीतिकनेताकेरूपमेंउभरे। जनवरी 1914 मेंगांधीजीअपनेलोगोंकीसेवाकरनेऔरअपनेदेशमेंस्वतंत्रतालानेकीमहत्वाकांक्षाकेसाथभारतलौटे।एकवर्षबादवहअहमदाबादकेसाबरमतीनदीकेतटरहनेलगेऔर 1915 मेंसाबरमतीआश्रमकीस्थापनाकी।पहलेउन्होंनेइसकानामसत्याग्रहआश्रमरखा, जिसेबादमेंसाबरमतीआश्रमकहाजानेलगा।वहांउन्होंनेलोगोंकीसेवाकेलिएखुदकोसमर्पितकियाऔरलोगोंसेसत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्यऔरचोरीनकरनेकीप्रतिज्ञाली।जबरॉलेटएक्टपारितकियागया, तबभारतीयोंकीनागरिकस्वतंत्रताकोनकारदिया, जिसकेबादगांधीजीसक्रियभारतीयराजनीतिमेंआगए।वहस्वतंत्रतासंग्राममेंसबसेआगेआयेऔरकुछहीवर्षोंमेंवहस्वतंत्रताकेलिएराष्ट्रीयआंदोलनकेनिर्विवादनेताबनगए।वहभारतीयराष्ट्रीयकांग्रेसकेअध्यक्षबने।उन्होंनेब्रिटिशशासनकाविरोधकियाऔरभारतकोविदेशीकानूनसेमुक्तकरनेकेलिएराष्ट्रीयआंदोलनशुरूकिया। जिसमें 1920 मेंअसहयोगआंदोलन, 1939 मेंसविनयअवज्ञाआंदोलन, नमककानूनतोड़नेऔर 1942 मेंभारतछोड़ोआंदोलनआदिशामिलहै।इनआंदोलनोंनेभारतमेंब्रिटिशसाम्राज्यकीनींवहिलादीऔरलाखोंभारतीयोंकोस्वतंत्रतासंग्रामआंदोलनमेंएकसाथखड़ाकरदिया।गांधीजीनेस्वतंत्रताप्राप्तकरनेकेलिएअहिंसाऔरसत्याग्रहकोअपनेप्रमुखहथियारबनाया।गांधीकेमार्गदर्शनऔरप्रभावनेकईमहिलाओंकोस्वतंत्रताआंदोलनकाहिस्साबननेकेलिएप्रोत्साहितकिया।आंदोलनोंकेलिएगांधीजीकोकईबारगिरफ्तारभीकियागया।लेकिनराष्ट्रीयस्वतंत्रताकेलिएउनकेसंकल्पकोकोईरोकनहींसका।उनकेनेतृत्वमेंसभीभारतीयोंनेस्वतंत्रताकेलिएआवाजउठाई।तबअंग्रेजोंनेमहसूसकियाकिवहअबभारतमेंनहींरहसकतेहैंऔर 15 अगस्त 1947 कोहमारेदेशस्वतंत्रतहोगया। गांधीजीकाभारतीयस्वतंत्रतामेंसबसेबड़ायोगदानरहाहै।वहएकमहाननेताऔरसमाजसुधारकभीथे।उन्होंनेदुनियाभरकेकईमहाननेताओंकोबिनाहिंसाकेअपनीस्वतंत्रताकेलिएलड़नेकेलिएप्रभावितकिया।गांधीजीनेहिंदू-मुस्लिमएकता, छुआछूत, पिछड़ेवर्गोंकेउत्थान, सामाजिकविकासकेकेंद्र, गांवकाविकास, सामाजिकस्वतंत्रताऔरस्वदेशीवस्तुओंकाउपयोगआदिपरकाफीजोरदिया।भारतकेस्वतंत्रताआंदोलनकोगांधीवादीयुगभीकहाजाताहै।गांधीजीसादाजीवनजीनेऔरउच्चविचारमेंविश्वासरखतेथे।वहलोकतंत्रकेपक्षधारऔरतानाशाहीशासनकेविरोधीथे।लेकिनस्वतंत्रताप्राप्तहोनेके 6 महीनेबादही 30 जनवरी 1948 कोनाथूरामगोडसेनेउनकीगोलीमारकरहत्याकरदीथी।वहउससमयशामकीप्रार्थनासभामेंजाररहेथे।लेकिनवहमरनेकेबादभीहरभारतीयकेदिलमेंअमरहोगए।आजमहात्मागांधीको 'राष्ट्रपिता' केरूपमेंजानाजाताहै, लोगउन्हेंप्यारसे 'बापू' भीबुलातेहैं।ऐसेमहानस्वतंत्रतासेनानीकोमेराकोटिकोटिनमन. उनका मानना था कि बोलने के परहेज से उन्हें आतंरिक शान्ति मौन सिद्धांत का है, शान्ति जॉन रस्किन अमरपक्षी अवस्थापन कहा जाता था। दक्षिण अफ्रीका, जहाँ से उन्होंने वकालत पूरी की थी तथा धन और सफलता के साथ जुड़े थे। वहां से लौटने के पश्चात् उन्होंने पश्चमी शैली के वस्त्रों का त्याग किया। उन्होंने भारत के सबसे गरीब इंसान के द्वारा जो वस्त्र पहने जाते हैं उसे स्वीकार किया, तथा घर में बने हुए कपड़े खादी पहनने की वकालत भी की। गाँधी और उनके अनुयायियों ने अपने कपड़े सूत के द्वारा ख़ुद बुनने के अभ्यास को अपनाया और दूसरो को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया हालाँकि भारतीय श्रमिक बेरोज़गारी के कारण बहुधा आलसी थे, वे अक्सर अपने कपड़े उन औद्योगिक निर्माताओं से खरीदते थे जिसका उद्देश्य ब्रिटिश हितों को पुरा करना था। गाँधी का मत था कि अगर भारतीय अपने कपड़े ख़ुद बनाने लगे, तो यह भारत में बसे ब्रिटिशों को आर्थिक झटका लगेगा। फलस्वरूप, बाद में विश्वास गाँधी का जन्म हिंदू धर्म में हुआ, उनके पूरे जीवन में अधिकतर सिद्धान्तों की उत्पति हिंदू धर्म, इसे जैसा मैंने समझा है, मेरी आत्मा को पूरी तरह तृप्त करता है, मेरे प्राणों को आप्लावित कर देता है,. जब संदेह मुझे घेर लेता है, जब निराशा मेरे सम्मुख आ खड़ी होती है, जब क्षितिज पर प्रकाश की एक किरण भी दिखाई नहीं देती, तब मैं ' गाँधी स्मृति जिस घर में गाँधी ने अपने अन्तिम ४ महीने बिताये, वह आज एक स्मारक बन गया है, नयी दिल्ली गाँधी ने भगवद् गीता की व्याख्या गाँधी का मानना था कि प्रत्येक धर्म के मूल में सत्य और प्रेम होता है। उनका कहना है कि 'कुरान', 'बाइबिल', 'जेन्द-अवेस्ता', 'तालमुड', अथवा 'गीता' किसी भी माध्यम से देखिए, हम सबका ईश्वर एक ही है, और वह सत्य तथा प्रेम स्वरूप है। किंतु जिस तरह मैं ईसाई धर्म को स्वीकार नहीं कर सका, उसी तरह हिंदू धर्म की संपूर्णता के विषय में अथवा उसके सर्वोपरि होने के विषय में भी मैं उस समय निश्चय नहीं कर सका। हिंदू धर्म की त्रुटियां मेरी आँखों के सामने तैरती रहती थीं। यदि अस्पृश्यता हिंदू धर्म का अंग है जो ऐसा जान पड़ा कि वह एक सड़ा और बाद में जोड़ा गया अंग है। अनेक संप्रदायों और अनेक जाति-भेदों का होना भी मेरी समझ में नहीं आता था। केवल वेद ही ईश्वर-प्रणीत हैं, इस बात का क्या अर्थ है। यदि वेद ईश्वर-प्रणीत हैं, तो बाइबिल और कुरान क्यों नहीं हैं? कुछ 2 साल बाद सन् 1885 में गाँधी जी 15 साल के हो गये थे और तभी उन्हें पहली संतान ने जन्म लिया था,लेकिन कुछ ही समय पश्चात उसकी मृत्यु हो गयी औरउसी वर्ष गांधी जी के पिता करमचंद गांधी जी की मृत्यु हो गयी. 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महात्मा गॉंधी पर निबंध: Mahatma Gandhi Essay in Hindi

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. गौडसे और उनके सह् षड्यंत्रकरी नारायण आप्टे को केस चलाकर जेल भेज कर सजा दी गयी थी उन्हें 15 नवम्बर 1949 को फांसी दी गयी थी. सुरेन्द्र भाना और गुलाम वाहेद, २००५: पीपी. Mahatma Gandhi made many movements against the British, including Champaran Movement, Kheda Movement, Khilafat Movement, Nam Movement and Quit India Movement. अभिगमन तिथि 22 जुलाई 2018. स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास.

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Essay On Mahatma Gandhi In Hindi (100, 200, 300, 500, 700, 1000 Words)

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महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था। इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। इनके पिता का नाम करमचंद गांधी था। मोहनदास की माता का नाम पुतलीबाई था जो करमचंद गांधी जी की चौथी पत्नी थीं। मोहनदास अपने पिता की चौथी पत्नी की अंतिम संतान थे। महात्मा गांधी को ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का नेता और 'राष्ट्रपिता' माना जाता है। परिवार- गांधी की मां पुतलीबाई अत्यधिक धार्मिक थीं। उनकी दिनचर्या घर और मंदिर में बंटी हुई थी। वह नियमित रूप से उपवास रखती थीं और परिवार में किसी के बीमार पड़ने पर उसकी सेवा सुश्रुषा में दिन-रात एक कर देती थीं। मोहनदास का लालन-पालन वैष्णव मत में रमे परिवार में हुआ और उन पर कठिन नीतियों वाले जैन धर्म का गहरा प्रभाव पड़ा। जिसके मुख्य सिद्धांत, अहिंसा एवं विश्व की सभी वस्तुओं को शाश्वत मानना है। इस प्रकार, उन्होंने स्वाभाविक रूप से अहिंसा, शाकाहार, आत्मशुद्धि के लिए उपवास और विभिन्न पंथों को मानने वालों के बीच परस्पर सहिष्णुता को अपनाया। विद्यार्थी के रूप में- मोहनदास एक औसत विद्यार्थी थे, हालांकि उन्होंने यदा-कदा पुरस्कार और छात्रवृत्तियां भी जीतीं। वह पढ़ाई व खेल, दोनों में ही तेज नहीं थे। बीमार पिता की सेवा करना, घरेलू कामों में मां का हाथ बंटाना और समय मिलने पर दूर तक अकेले सैर पर निकलना, उन्हें पसंद था। उन्हीं के शब्दों में- 'बड़ों की आज्ञा का पालन करना सीखा, उनमें मीनमेख निकालना नहीं।' युवा गांधी जी- 1887 में मोहनदास ने जैसे-तैसे 'मुंबई यूनिवर्सिटी' की मैट्रिक की परीक्षा पास की और भावनगर स्थित 'सामलदास कॉलेज' में दाखिल लिया। अचानक गुजराती से अंग्रेजी भाषा में जाने से उन्हें व्याख्यानों को समझने में कुछ दिक्कत होने लगी। इस बीच उनके परिवार में उनके भविष्य को लेकर चर्चा चल रही थी। अगर निर्णय उन पर छोड़ा जाता, तो वह डॉक्टर बनना चाहते थे। लेकिन वैष्णव परिवार में चीर-फाड़ की इजाजत नहीं थी। साथ ही यह भी स्पष्ट था कि यदि उन्हें गुजरात के किसी राजघराने में उच्च पद प्राप्त करने की पारिवारिक परंपरा निभानी है तो उन्हें बैरिस्टर बनना पड़ेगा और ऐसे में गांधीजी को इंग्लैंड जाना पड़ा। जब भारत लौट आए- सन् 1914 में गांधी जी भारत लौट आए। देशवासियों ने उनका भव्य स्वागत किया और उन्हें महात्मा पुकारना शुरू कर दिया। उन्होंने अगले चार वर्ष भारतीय स्थिति का अध्ययन करने तथा उन लोगों को तैयार करने में बिताए जो सत्याग्रह के द्वारा भारत में प्रचलित सामाजिक व राजनीतिक बुराइयों को हटाने में उनका साथ दे सकें। गांधी जी के बारे में प्रख्यात वैज्ञानिक आइंस्टीन ने कहा था कि- 'हजार साल बाद आने वाली नस्लें इस बात पर मुश्किल से विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना ऐसा कोई इंसान भी धरती पर कभी आया था। ऐसे महान व्यक्तित्व के धनी महात्मा गांधी की 30 जनवरी, 1948 को नई दिल्ली के बिड़ला भवन में नाथूराम गोडसे द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई। विश्व पटल पर महात्मा गांधी सिर्फ एक नाम नहीं अपितु शांति और अहिंसा का प्रतीक हैं।. गाँधी: एक छायाचित्र जीवनी. . Can I simply say what a aid to seek out someone who truly is aware of what theyre speaking about on the internet. अभिगमन तिथि 13 नवंबर 2008. गाँधी के पाठक: उनके जीवन और लेखन का एक स्रोत पुस्तक.

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महात्मा गांधी पर निबंध

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After the death of Mahatma Gandhi, in the memory of him and being the father of the nation, his picture is seen in the currency of India. द एसेनसियल गांधी: उनके जीवन, कार्यों और विचारों का संग्रह. ऐ: यहूदी समाज का प्रकाशन, १९९७, पीपी. और इसके लिए मैं यहूदी भाइयों का इंतज़ार नाहे करूंगा कि वे आयें और मेरे वैधानिक प्रैत्रोध में मुझसे जुडें, बल्कि मुझे आत्मविश्वास होगा कि आख़िर में सभी मेरा उदहारण मानने के लिए बाध्य हो जायेंगे. अभिगमन तिथि 13 नवंबर 2008.

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हिन्दी निबंध : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

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अभिगमन तिथि 17 जुलाई 2019. Gandhi always believed in living life. द मेकिंग ऑफ़ अ पोलिटिकल रिफोर्मार: गाँधी इन साऊथ अफ्रीका, १९१३-१९१४ में टिप्पणी किया है। अनुभाग " दक्षिण अफ्रीका के लिए गाँधी के विरासत" में वे लिखते हैं " गाँधी ने दक्षिण अफ्रीका के सक्रिय कार्यकर्ताओं के आने वाली पीढियों को श्वेत अधिपत्य को ख़त्म करने के लिये प्रेरित किया। यह विरासत उन्हें राज्य विरोधी गाँधी हिंदुस्तान को इंगलिस्तान बनाना है. अभिगमन तिथि 17 जुलाई 2019. बिहार का यह संकट तो केवल शरीर का नाश करने वाला है, मगर अस्पृश्यता-जनित संकट तो हमारी आत्मा को नष्ट कर रहा है। इसलिए बिहार की इस विपत्ति से हमें यह सीख लेनी चाहिए कि अपनी चंद शेष सांसो के रहते हुए हम अस्पृश्यता के इस कलंक से मुक्ति पाकर अपने-आपको अपने सिरजनहार के समक्ष स्वच्छ हृदय लेकर उपस्थित होने योग्य बना लें। मुझे तो यह विश्वास होता जा रहा है कि हम पर यह विपत्ति अस्पृश्यता के इस महापाप के फलस्वरूप ही आई है। मैं आपसे विनती करता हूँ कि आप मेरी बात पर मन ही मन हँस कर ऐसा न सोचें कि मैं तो आपके अंधविश्वास की वृत्ति को जगा रहा हूँ। मैं ऐसा कुछ नहीं कर रहा हूँ।. . द मेकिंग ऑफ़ अ पोलिटिकल रिफोर्मार: गाँधी इन साऊथ अफ्रीका, १८९३-१९१४.

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