Ipc section 380 in hindi. SECTION 380 IPC IN HINDI PUNISHMENT धारा 380 क्या है पूरी जानकारी 2022-10-14

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आईपीसी सेक्शन 380 भ्रष्टाचार और चोरी के संबंध में है। यह भारत में व्यवस्थित होने वाले भारतीय दंड संहिता की एक धारा है। इस धारा के अंतर्गत, जब किसी व्यक्ति के पास किसी अन्य व्यक्ति की सामग्री या वस्तुएँ चोरी की होती हैं, तो उसे सजा दिया जाता है। इस सेक्शन में, चोरी के अधिकारों को जमा किया जाने वाला समय भी निर्धारित किया गया है।

इस सेक्शन में, चोरी के अधिकारों को जमा किया जाने वाला समय भी निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, यह सेक्शन भ्रष्टाचार के संबंध में भी है, जिसमें किसी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति

IPC Section 380

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My name is Advocate Shivam Singh is the one who will give you all the law-related information here. Classification of offences under Section 379, 380, 381, 382, 384, 385, 386, 387, 388, 389, 392, 393, 394, 395, 396, 397, 398, 399, 400, 401 and 402 of Indian Penal Code 1860 Offences against property and punishment for the crime are defined under Section 379, 380, 381, 382, 384, 385, 386, 387, 388, 389, 392, 393, 394, 395, 396, 397, 398, 399, 400, 401 and 402 of Indian Penal Code 1860. IPC Chapter XVII S. इसके बारे में पूर्ण रूप से बात होगी और आपको धारा 34 IPC In Hindi के बारे मे सारी जानकारी हो जाएगी। साथ ही यह पोर्टल www. Ltd के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क है.

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All IPC Section List

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Supreme Court of India Important Judgments And Case Law Related to Section 380 of Indian Penal Code 1860: Birla Corporation Ltd. Section 380 IPC in Hindi and English Section 380 of IPC 1860:- Theft in dwelling house, etc. IPC की धारा 380 — निवास-गृह, आदि में चोरी — जो कोई ऐसे किसी निर्माण, तम्बू या जलयान में चोरी करेगा, जो निर्माण, तम्बू या जलयान मानव निवास के रूप में, या संपत्ति की अभिरक्षा के लिए, उपयोग में आता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा। अपराध का वर्गीकरण—इस धारा के अधीन अपराध, संज्ञेय, अजमानतीय, अशमनीय और कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है IPC Section 380 —Theft in dwelling house, etc. If you want IPC section list then I have given complete information about it in this post. Classification of offences relating to these sections are: CHAPTER XVII - OFFENCES AGAINST PROPERTY IPC Section Offence Punishment Cognizable or non-cognizable Bailable or non-bailable By what court triable 379 IPC Theft Imprisonment for 3 years, or fine, or both Cognizable Non-bailable Any Magistrate 380 IPC Theft in a building, tent or vessel Imprisonment for 7 years and fine Cognizable Non-bailable Any Magistrate 381 IPC Theft by clerk or servant of property in possession of master or employer Imprisonment for 7 years or fine Cognizable Non-bailable Any Magistrate 382 IPC Theft, after preparation having been made for causing death, or hurt, or restraint, or fear of death, or of hurt, or of restraint, in order to the committing of such theft, or to retiring after committing it, or to retaining property taken by it Rigorous imprisonment for 10 years and fine Cognizable Non-bailable Magistrate of the first class 384 IPC Extortion Imprisonment for 3 years, or fine, or both Cognizable 385 IPC Putting or attempting to put in fear of injury, in order to commit extortion Imprisonment for 2 years, or fine, or both Cognizable Bailable Any Magistrate 386 IPC Extortion by putting a person in fear of death or grievous hurt Imprisonment for 10 years and fine Cognizable Non-bailable Magistrate of the first class 387 IPC Putting or attempting to put a person in fear of death or grievous hurt in order to commit extortion Imprisonment for 7 years and fine Cognizable Non-bailable Magistrate of the first class 388 IPC Extortion by threat of accusation of an offence punishable with death, imprisonment for life, or imprisonment for 10 years Imprisonment for 10 years and fine Cognizable Bailable Magistrate of the first class If the offence threatened be an unnatural offence Imprisonment for life Cognizable Bailable Magistrate of the first class 389 IPC Putting a person in fear of accusation of an offence punishable with death, imprisonment for life, or imprisonment for 10 years in order to commit extortion Imprisonment for 10 years and fine Cognizable Bailable Magistrate of the first class If the offence be an unnatural offence Imprisonment for life Cognizable Bailable Magistrate of the first class IPC Section Offence Punishment Cognizable or non-cognizable Bailable or non-bailable By what court triable 392 IPC Robbery Rigorous imprisonment for 10 years and fine Cognizable Non-bailable Magistrate of the first class If committed on the highway between sunset and sunrise Rigorous imprisonment for 14 years and fine Cognizable Non-bailable Magistrate of the first class 393 IPC Attempt to commit robbery Rigorous imprisonment for 7 years and fine Cognizable Non-bailable Magistrate of the first class 394 IPC Person voluntarily causing hurt in committing or attempting to commit robbery, or any other person jointly concerned in such robbery Imprisonment for life or Rigorous imprisonment for 10 years and fine Cognizable Non-bailable Magistrate of the first class 395 IPC Dacoity Imprisonment for life or Rigorous imprisonment for 10 years and fine Cognizable Non-bailable Court of Session 396 IPC Murder in dacoity Death, imprisonment for life, or rigorous imprisonment for 10 years and fine Cognizable Non-bailable Court of Session 397 IPC Robbery or dacoity with attempt to cause death or grievous hurt Rigorous imprisonment for not less than 7 years Cognizable Non-bailable Court of Session 398 IPC Attempt to commit robbery or dacoity when armed with deadly weapon Rigorous imprisonment for not less than 7 years Cognizable Non-bailable Court of Session 399 IPC Making preparation to commit dacoity Rigorous imprisonment for 10 years and fine Cognizable Non-bailable Court of Session 400 IPC Belonging to a gang of persons associated for the purpose of habitually committing dacoity Imprisonment for life, or rigorous imprisonment for 10 years and fine Cognizable Non-bailable Court of Session 401 IPC Belonging to a wandering gang of persons associated for the purpose of habitually committing thefts Rigorous imprisonment for 7 years and fine Cognizable Non-bailable Magistrate of the first class 402 IPC Being one Of five or more persons assembled for the purpose of committing dacoity Rigorous imprisonment for 7 years and fine Cognizable Non-bailable Court of Session. धारा 380 का विस्तार से विवरण Detail Description of Section 380 धारा 380 भारतीय दंड संहिता से तात्पर्य है जो कोई ऐसे किसी निर्माण तंबू या जलयान में चोरी करेगा जो उन निर्माण तंबू या जलयान मानव निवास के रूप में यह संपत्ति की अभिरक्षा के लिए उपयोग में आता हूं वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि 7 वर्ष तक की हो सकेगी दंडित किया जाएगा एवं जुर्माने से भी दंडनीय होगा। संहिता की धारा 103 में प्रयुक्त भाषा के एक भाग को धारा 380 में भी प्रयुक्त किया गया है निर्माण शब्द का अर्थ किसी प्रकार से स्थाई भवन से है इस शब्द का तंबू और जलयान शब्दों के साथ प्रयोग यह दर्शाता है कि किसी प्रकार का एक वास्तु होना चाहिए जिसका आशय उस में निवास करने वाले व्यक्तियों या वहां रखी गई संपत्ति को कुछ सुरक्षा प्रदान करना हो Section 380 of IPC 1860:- Theft in dwelling house, etc.


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Section 380 IPC in Hindi and English

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B on 11 January, 1994 Manmohan Singh vs State Of Punjab on 31 January, 1997 State Of U. भारत का संविधान एक पवित्र दस्तावेज है इसमें विश्व के प्रमुख संविधान ओं की विशेषताएं समाहित हैं यह संविधान निर्मात्री सभा के 2 वर्ष 11 माह 18 दिन के सतत प्रयत्न, अध्ययन विचार, विमर्श चिंतन एवं परिश्रम का निचोड़ है इसे 26 जनवरी 1950 को संपूर्ण भारत पर लागू किया गया। List of 100+ Landmark Cases of Supreme Court India भारत के संविधान की प्रमुख विशेषताएं निम्नांकित हैं- 1. लागू अपराध applicable offense धारा 380 के अतर्गत लागू अपराध निम्न प्रकार से हैं अपराध-गैर जमानती यह अपराध संज्ञये अपराधों की श्रेणी में आता है अजमानतीय ओर शयमनिय है सजा- 7 वर्ष तक का कारावास व आर्थिक दण्ड अथवा दोनो किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं होता है धारा 380 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत जमानत के प्रावधान Provision for bail under section 380 Indian penal code धारा 380 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत जमानत के प्रावधान कुछ इस प्रकार बताए गए हैं जब धारा 380 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट पुलिस थाने में अभियुक्त के खिलाफ दर्ज होती है तो अभियुक्त को लगता है कि यह f. विशालतम संविधान- सामान्यतया संविधान का आकार अत्यंत छोटा होता है संविधान में मोटी मोटी बातों का उल्लेख कर दिया जाता है और अन्य बातें अर्थान्वयन के लिए छोड़ दी जाती हैं लेकिन भारत का संविधान इसका अपवाद है भारत के संविधान का आकार ने तो अत्यधिक छोटा रखा गया है और ना ही अत्यधिक बड़ा हमने सभी आवश्यक बातें समाहित करते हुए संतुलित आकार का रखा है। संविधान के मूल प्रारूप में 22 भाग 395 अनुच्छेद तथा 9 अनुसूचियां थी कालांतर में संशोधनों के साथ साथ इनमें अभिवृद्धि होती गई। सर आई जेनिंग्स के शब्दों म 100 Important Facts of Indian Constitution and Polity. Indian Penal Code in Hindi and English language. Which of the following is not true regarding the payment of the emoluments of the President? Who among the following holds office during the pleasure of the President? इसके बारे में पूर्ण रूप से बात होगी और आपको धारा 52 IPC In Hindi के बारे मे सारी जानकारी हो जाएगी। साथ ही यह पोर्टल www.

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SECTION 380 IPC IN HINDI PUNISHMENT धारा 380 क्या है पूरी जानकारी

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देश में जैसे जैसे बेरोजगारी, महंगाई बढ़ती जा रही है Indian Penal Code IPC Section 380-381-382-383 in Hindi वैसे वैसे देश में लूटपाट , चोरी की घटनाये भी दिन प्रतिदिन बढ़ रही हैं। अब लूटपाट करना या चोरी करना कोई देशहित का काम तो है नहीं , इस लिए ऐसे गैरकानूनी कार्यों को रोकने के लिए भारतीय दंड सहिंता में उनकी सजा के बारे में बताया गया है। चोरी करने पर कौन सी धारा लगती है ,कितनी सजा होती है आज हम इसके बारे में विस्तार से बड़ी आसान भाषा में जानेंगे। आईपीसी की धारा 380 : IPC Section 380 जब कोई व्यकित घरों में या किसी भी भवन, तंबू में चोरी करता है, जिस भवन, तम्बू या पोत का उपयोग मानव आवास के रूप में किया जाता है, या संपत्ति की अभिरक्षा के लिए उपयोग किया जाता है में चोरी करता है तो उस पर दंड सहिंता की धारा 380 के तहत मामला दर्ज़ किया जाता है। धारा 380 में दोषी व्यकित को सात साल के कारावास , जुर्माने सहित सजा हो सकती है। ये संज्ञेय व गैर जमानती अपराध है। यह किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। आईपीसी की धारा 381 : IPC Section 381 जब कोई ऐसा व्यकित जो किसी कम्पनी में या बैंक में या किसी भी सरकारी गैर सरकारी विभाग में , कम्पनी में कार्यकर्त हो अगर वो वहां किसी प्रकार की चोरी या अपने मालिक की किसी प्रॉपर्टी को नुकसान पहुँचता है या कब्ज़ा करता है तो उसे आईपीसी की 381 के तहत मामला दर्ज़ होता है इसमें दोषी पाए व्यकित को एक अवधि के लिए किसी भी विवरण का जो सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा। ये संज्ञेय व गैर जमानती अपराध है। यह किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। Indian Penal Code IPC Section 380-381-382-383 in Hindi आईपीसी की धारा 382 : Indian Penal Code IPC Section 380-381-382-383 in Hindi जब कोई व्यक्ति चोरी करने या लूटपाट करने के इरादे से पूरी तैयारी के साथ जाता है यानि वह अपने साथ कोई भी जानलेवा हथियार , चोट पहुंचने वाला समान लेकर जाता है भले ही व चोरी के दौरान किसी सामने वाले जिसके घर या कार्यालय पर चोरी की उस पर प्रयोग नहीं करे लेकिन तब भी उस पर धारा 382 के तहत मामला दर्ज़ किया जायेगा। इसमें दोषी पाए व्यकित को कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकती है, और जुर्माने के लिए उत्तरदाई होगा। ये संज्ञेय व गैर जमानती अपराध है। ये फर्स्ट डिवीजन मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। आईपीसी की धारा 383 : IPC Section 383 जब कोई व्यकित किसी सामने वाले को ब्लैकमेलिंग करता है यानि किसी प्रकार से उसको जान से मरने की धमकी देता है , या उसके पारिवारिक सदस्यों को जान से मरने की धमकी देता है लेकिन उसका इरादा पैसे लेना है यानि जो कुछ भी वो कर रहा है उसके पीछे का मकसद अगर पैसा लेना है तो उस मामले में धारा 383 के तहत केस दर्ज़ होता है। अगर धमकी की वजह पैसा न होकर कोई और हो तब ये धारा नहीं लगती है फिर कोई और धारा उस केस के अनुसार लगती है यहां धारा 383 में धमकी की वजह पैसा मांगना या कोई मूलयवान सम्पति की मांग करना जैसे गाड़ी , गहने आदि की मांग करना भी इसी धारा के तहत आता है। इस धारा के तहत अपराध संज्ञेय, जमानती और गैर-शमनीय है, और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। इसमें आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।. This is actually a terrific web site. Dhara 34 Kya Hai इस ipcsection. सारे अधिकार रिजर्व्ड। 0. The President gives his resignation to the a Chief Justice b Parliament c Vice President d Prime Minister Answer: Vice President 3.

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IPC 52 In Hindi

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इस पोस्ट मे आपको Indian Penal Code IPC की IPC 52 In Hindi मे जानकारी दी गई है। इसमे मैने पूरी तरह से IPC 52 In English की पूरी जानकारी मैने दी है। क्योंकि इसकी जानकारी हर एक अधिवक्ता व वकील को तो होनी ही चाहिए तथा अगर आप पुलिस मे है या फिर आप विधि से संबंधित छात्र हैं तो भी आपको IPC Section 52 In Hindi के बारे मे जानकारी जरूर होनी चाहिए। जिससे की आप कहीं कभी फसें नहीं और न ही कोई आपको दलीलो मे फंसा सके। तो चलिए जानते है IPC 52 Kya Hai. धारा 380 का विवरण भारतीय दंड संहिता की धारा 380 के अनुसार, जो भी कोई ऐसे किसी इमारत, तम्बू या जलयान, जो मानव निवास या संपत्ति की अभिरक्षा के लिए उपयोग में आता हो, में चोरी करता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही आर्थिक दंड से दंडित किया जाएगा। लागू अपराध इमारत, तम्बू या पोत में चोरी करना सजा - सात वर्ष कारावास + आर्थिक दंड। यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है। LawRato. Luckily, this amazing drug, recently approved by state medical and pharmaceutical society will help you with your trouble. Impotence can hit you suddenly putting in question your relationship or marriage. धारा 380 यह भारतीय दंड संहिता 1860 मे चाप्टर 17 में दिया गया है। इस धारा 378 के तहत यदि कोई व्यक्ति किसी के निवास स्थल पर अथवा दुकान में और प्रतिष्ठान जैसे मानव विकास के रूप में संपत्ति की रक्षा का उपयोग में लाता हो, चोरी करेगा तो वह व्यक्ति सात वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना अथवा दोनो सजासे दंडनिय होगा। यह अपराध एक गैर जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध गैर जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नही मिलती। आईये इस लेख के माध्यम से आज हम धारा 380 आइ. What is the punishment for the crime? इसकी जानकारी भी दी है यदि फिर भी इस धारा से सम्बन्धित या अन्य धाराओं से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कुछ भी शंका आपके मन में हो या अन्य कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो आप हमें कमेंट बॉक्स के माध्यम से अपने प्रश्न और सुझाव हमें भेज सकते है आईपीसी धारा 338 क्या है अपराध सजा संज्ञेय जमानत विचारणीय ऐसे किसी घर या इमारत, तम्बू या जलयान पोत में चोरी, जो की मानव के निवास के लिए या संपत्ति की अभिरक्षा में उपयोग हो रहा हो। 7 वर्ष का कारावास + आर्थिक दंड संज्ञेय गैर जमानतीय किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय ट्रायल किया जा सकता आईपीसी धारा 336 क्या है.

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IPC Section 380. Theft in dwelling house, etc

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. सभी बातों को आज हम विस्तृत रूप से यहाँ जानेंगे, साथ ही इस पोर्टल www. What are the offences against property? आईपीसी धारा 384 क्या है भारतीय दंड सहिता IPC में निवास-गृह आदि में चोरी Theft in dwelling house को धारा 380 में परिभाषित किया गया है आज आपको हम यहाँ इस आर्टिकल में यही बताएंगे कि इस अपराध को कारित करने पर भारतीय दंड सहिता IPC की धारा 380 किस तरह अप्लाई होगी यहाँ हम आपको भारतीय दंड संहिता यानि कि IPC की धारा 380 क्या है? I have understand your stuff previous to and you are just extremely fantastic. The Governor of a State is appointed by the President on the advice of the a Prime Minister b Vice- President c Chief Minister d Chief Justice Answer: Prime Minister List of 100+ Landmark Cases of Supreme Court India 2. For what period does the Vice President of India hold office? भारतीय दंड संहिता की धारा 380 के अनुसार, जो भी कोई ऐसे किसी इमारत, तम्बू या जलयान, जो मानव निवास या संपत्ति की अभिरक्षा के लिए उपयोग में आता हो, में चोरी करता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही आर्थिक दंड से दंडित किया जाएगा। लागू अपराध इमारत, तम्बू या पोत में चोरी करना सजा - सात वर्ष कारावास + आर्थिक दंड। यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।. So for this reason and according to other people, I have prepared this post so that everyone can get Total IPC section list in English.

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IPC 34 In Hindi

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Dhara 52 Kya Hai इस ipcsection. इसके सभी पहलुओं के बारे में विस्तार से यहाँ समझने का प्रयास करेंगे इस पोर्टल के माध्यम से यहाँ धारा 380 में सजा के बारे में क्या प्रावधान बताये गए हैं, और इसमें कितनी सजा देने की बात कही गई है इनके बारे में पूर्ण रूप से बात होगी साथ ही भारतीय दंड संहिता IPC की धारा 380 में जमानत के बारे में क्या बताया गया है? Important question answers in Hindi from Constitution. Offence Punishment Theft in a building, tent or vessel 7 Years + Fine Cognizance Bail Triable By Cognizable Non-Bailable Any Magistrate Offence is. Enter Here — tinyurl. इन सब के बारे में विस्तार से हमने उल्लेख किया है, साथ ही इसमें जमानत के क्या प्रावधान होंगे? दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि आईपीसी धारा 380 क्या है। What is IPC section 380 in Hindi कैसे इसमें सजा और जमानत होती है। How is punishment and bail in IPC section 380 in Hindi यह धारा क्या कहती है। What does IPC section 380 says in Hindi , सब कुछ विस्तार से जानने कि कोशिश करेंगे तो आपको यह आर्टिकल अन्त तक पढ़ना है। अक्सर हम देखते हैं कि आए दिन चोरी होती रहती है किसी के घर में, किसी स्कूल में, किसी मंदिर में कोई ऐसी जगह नहीं जहां चोर चोरी नहीं कर सकता। कई बार तो चोर चोरी करते वक्त किसी निर्दोष व्यक्ति को चोट भी पहुंचा देता है अगर वो व्यक्ति चोर को चोरी करने से रोकता है तो। आजकल तो चोर काफ़ी बड़ी बड़ी चोरी करते हैं जैसे किसी सोने चांदी की दुकान को लूट लेते हैं या किसी बैंक में डाका डाल देते हैं। आज हम ऐसे ही एक धारा के बारे में जानेंगे की कैसे चोरी करने पर क्या सजा होती है, कैसी चोरी पर यह धारा लगाई जाती है। यह धारा में कैसे जमानत होती है। सब कुछ बताएंगे बस आर्टिक्ल पूरा पढ़ना। आईपीसी धारा 380 क्या है। What is IPC Section 380 in Hindi भारतीय दंड संहिता कि धारा 380 के अनुसार यदि कोई किसी ऐसी इमारत या तम्बू जो मानव निवास के उपयोग में आता हो, उसमे चोरी करता है तो ऐसे व्यक्ति को 7 वर्ष की कारावास और आर्थिक जुर्माना लगा कर दंडित किया जाता है। यह एक गैर जमानती अपराध है किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। किसी भी ग़ैर कानूनी तरह से चोरी करना एक गंभीर अपराध है, किसी मंदिर या किसी ऐसी जगह जो मानव निवास के लिए उपयोग में आती हो ऐसी जगह चोरी करना एक बड़ा अपराध माना गया है। Most Read: Example: कमलेश का घर मंदिर के पास है, तो कमलेश किसी दिन मंदिर मे रखी मूर्ति को चोरी करने का सोचता है और मौका पाकर वह रात में जाता है चोरी करने, जब चोरी कर रहा होता है रात में तो कोई उसे देख लेता है और वह आदमी बाकी आस पास के लोगो को बता कर पुलिस को बुलवा लेता है। मौके पर पुलिस आ जाती है और कमलेश को गिरफ़्तार कर लेती है, जब कमलेश को कोर्ट में पेश किया जाता है तो न्यायालय उसे 7 वर्ष की कारावास और आर्थिक जुर्माना लगा कर दंडित करती है। धारा 380 में सजा का प्रावधान Punishment in IPC Section 380 in Hindi भारतीय दंड संहिता कि धारा 380 के अनुसार यदि कोई किसी ऐसी इमारत या तम्बू या ऐसी कोई जगह जो मानव निवास के उपयोग में आती हो तो ऐसे आरोपी को 10 वर्ष की कारावास और आर्थिक जुर्माना लगा कर दंडित किया जाता है। किसी कानूनी जगह पर चोरी करना एक बड़ा अपराध है। इसमें आरोपी को बच पाना मुश्किल होता है। किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है यह एक संज्ञेय अपराध है, समझौता करने योग्य नहीं है। धारा 380 में जमानत का प्रावधान Bail in IPC Section 380 in Hindi IPC Section 380 के अनुसार चोरी करना एक ग़ैर जमानती अपराध है। जिसमें किसी भी आरोपी को ज़मानत मिलना काफ़ी मुश्किल होता है। यह काफ़ी गंभीर अपराधों में से एक अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में न्यायालय काफ़ी सोच विचार कर निर्णय लेती है ताकि आगे चलकर कोई ओर चोरी ना हो सकें। अगर उसे आसानी से ज़मानत दे दी जाएगी तो वो ऐसे चोरी दोबारा करने को सोचेगा और शायद कर भी ले। Most Read: धारा 380 में एक वकील की ज़रूरत क्यों होती है। भारतीय दंड संहिता के अनुसार यह एक गैर जमानती अपराध है तो ऐसे में किसी भी आरोपी को एक वकील ही बचा सकता है। ऐसे में अगर आरोपी उच्च न्यायालय में अपने जमानत की याचिका दायर करता है तो उसकी याचिका को निरस्त कर दिया जाता है। यह काफ़ी संगीन अपराध है किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। ऐसे में आरोपी को एक वकील ही जमानत दिलवा सकता है जो अपने क्षेत्र में निपुण हो और आरोपी को निर्दोष साबित कर सकता हो। Note: इस धारा से बचने का तरीका यह है कि चोरी नहीं करें अगर चोरी करने में सफल नही हुए तो आपका ज्यादा नुक़सान हों सकता है। चोरी छोटी हो या बड़ी अगर करते हुए पकड़े गए तो आसानी से बच पाना मुश्किल हो जाता है। कोर्ट के कई चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। Most Read: इस आर्टिकल में हमने पुरी कोशिश की है कि आपको आसान भाषा में समझाए और बताए की आखिर आईपीसी धारा 380 क्या है What is IPC 380 in Hindi आईपीसी धारा 380 में सजा और जमानत कैसे होती है How is punishment and bail in IPC section 380 in Hindi कैसे इससे सजा सुनाई जाती है। क्यों इस धारा में जमानत मिलना मुश्किल होता है। कैसे बचा जाए, कैसे न्यायालय फैसला लेती है। अगर आपको लगता है कि यह सब लोगों का इस धारा के बारे में जानना जरूरी है तो अपने साथियों के साथ जरूर शेयर करें और उन्हें ऐसा कुछ कार्य करने से बचाएं।. Description Whoever commits theft in any building, tent or vessel, which building, tent or vessel is used as a human dwelling, or used for the custody of property, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

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IPC 380 in Hindi

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I am giving this information to you who is himself an LLB Graduate student. हमारी रिफंड और कैंसलेशन पालिसी देखे LawRato. You make it entertaining and you still take care of to keep it smart. इस पोस्ट मे आपको Indian Penal Code IPC की IPC 34 In Hindi मे जानकारी दी गई है। इसमे मैने पूरी तरह से IPC 34 In English की पूरी जानकारी मैने दी है। क्योंकि इसकी जानकारी हर एक अधिवक्ता व वकील को तो होनी ही चाहिए तथा अगर आप पुलिस मे है या फिर आप विधि से संबंधित छात्र हैं तो भी आपको IPC Section 34 In Hindi के बारे मे जानकारी जरूर होनी चाहिए। जिससे की आप कहीं कभी फसें नहीं और न ही कोई आपको दलीलो मे फंसा सके। तो चलिए जानते है IPC 34 Kya Hai. One hundred questions and answers from Constitution of India. IPC FAQ About In IPCSection.

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